मंगलवार, 12 नवंबर 2019
शनिवार, 9 नवंबर 2019
Nainital uttranchal deep
टोल प्लाजा देता फ्री ये सुविधाएं
टोल टैक्स देने के बाद आगे की यात्रा के दौरान आपको कुछ फ्री इमरजेंसी सुविधाएं भी दी जाती हैं। इन सुविधाओं में एंबुलेंस, क्रेन से लेकर गाड़ी में डीजल व पेट्रोल खत्म होने पर ईंधन उपलब्ध कराना शामिल है।रामपुर-काठगोदाम फोर लेन का काम पूरा होने वाला है, उत्तराखंड आने वालों और उत्तराखंड से बाहर जाने वालों को अब टोल प्लाजा पर टैक्स देना होगा। इसलिए यह जानकारी कुमाऊं के वाशिंदों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है। वैसे नेशनल हाइवे पर आप निजी वाहन से जिस भी दिशा में निकलते हैं हर 70-80 किलोमीटर पर टोल प्लाजा पर टैक्स देना पड़ता है, लेकिन निजी वाहन से यात्रा करने वाले ज्यादातर लोगों को यह नहींपता कि टोल प्लाजा पर टोल टैक्स देने के बाद आगे की यात्रा के दौरान आपको कुछ फ्री इमरजेंसी सुविधाएं भी दी जाती हैं। इन सुविधाओं में एंबुलेंस, क्रेन से लेकर गाड़ी में डीजल व पेट्रोल खत्म होने पर इन्हें उपलब्ध कराना शामिल है। लोग अपने निजी वाहनों से जब राष्ट्रीय मार्ग पर चलते हैं तो टोल प्लाजा पर टैक्स देने के बदले रसीदे मिलती है। क्या आप जानते हैं कि रसीद के कितने फायदे हैं...। इसलिए आपको सलाह है कि टोल प्लाजा की रसीदों को तब तक संभालकर रखें, जब तक आपकी यात्रा पूरी नहींहो जाती है। अगर रसीदे खो दी तो टोल प्लाजा द्वारा दी जाने वाली सुविधाओं से आप वंचित रह सकते हैं। नेशनल हाईवे के टोल प्लाजा से जारी की जाने वाली रसीद के पीछे चार फोन नंबर छपे होते हैं। इन चार फोन नंबर में पहला हेल्पलाइन, दूसरा क्रेन सर्विस का, तीसरा एंबुलेंस सर्विस का और पेट्रोल-डीजल सर्विस का होता है। दरअसल राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यात्रा के दौरान टोल टैक्स लेने के बदले यात्रियों को ये सेवाएं फ्री देता है। ये चारों नंबर नेशनल हाइवे अथारिटी ऑफ इंडिया की वेबसाइट पर भी मिल जाएंगे। खास बात यह है कि ये चारों हेल्पलाइन नंबर तुरंत उठते हैं और तत्काल मदद उपलब्ध की जाती है।
नेशनल हाईवे पर यात्रा के दौरान कभी भी मेडिकल इमरजेंसी आवश्यकता पड़ सकती है। यानी आप या आपके साथ यात्रा कर रहा कोई व्यक्ति बीमार होता तो आप रसीद पर दर्ज मेडिकल इमरजेंसी फोन नंबर पर कॉल कर कॉल के 10 मिनट में एम्बुलेंस पहुंच जाएगी। यदि हल्की फुल्की चिकित्सा की जरूरत है तो ये तुरंत दी जाएगी, अन्यथा एम्बुलेंस तुरंत रोगी को निकटवर्ती अस्पताल या नर्सिंग होम तक पहुंचा देगी। पूरे देश के नेशनल हाईवे पर यात्रा के समय किसी भी तरह की दिक्कत के लिए 1033 और 108 हेल्पलाइन नंबर है, इस पर भी तुरंत मदद मिलती है। यह सेवा चौबीस घंटे चालू रहती है। यदि अचानक आपकी गाड़ी का ईंधन खत्म हो जाए तो चिंता की बात नहीं है, आप सड़क के किनारे वाहन खड़ा करें और रसीद पर दिए गए हेल्पलाइन नंबर या फिर पेट्रोल हैल्प लाइन नंबर पर फोन करें, आपको जल्दी ही पांच या 10 लीटर पेट्रोल अथवा डीजल की आपूर्ति कर दी जाएगी। इस ईंधन की कीमत का भुगतान आपको ही करना होगा। इसके अलावा यात्रा के समय आपके वाहन में कोई खराबी आ जाए तो नेशनल हाईवे की हेल्पलाइन तुरंत मदद करेगी। नेशनल हाईवे की हेल्पलाइन अपने वाहन से एक मैकेनिक को लेकर आपके पास पहुंचेगी मैकेनिक को लेकर आने की सुविधा तो मुफ्त है लेकिन आपकी कार या वाहन में जो खराबी है, उसका चार्ज जरूर मैकेनिक वसूल करेगा। यदि वाहन में कोई बड़ी खराबी है तो आपके वाहन को क्रेन उठाकर निकटवर्ती सर्विस सेंटर तक पहुंचा देगी। सभी टोल प्लाजा पर एम्बुलेंस, रिकवरी वैन और सिक्योरिटी टीम रहती है, लेकिन आमतौर पर लोगों को इसकी जानकारी नहीं होती और सफर के दौरान कोई समस्या आती है तो परेशान हो जाते हैं, तनाव में आ जाते हैं, समझ में नहीं आता कि क्या करें किसकी मदद लें।
नेशनल हाइवे अथारिटी के हैल्पलाइन नंबर
हेल्पलाइन नंबर - 1033,108
क्रेन हेल्पलाइन नंबर - 8577051000, 7237999955
एंबुलेंस हेल्पलाइन नंबर - 8577051000, 7237999911
पेट्रोल हेल्पलाइन नंबर - 8577051000, 7237999944
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गुरुवार, 19 सितंबर 2019
भ्रष्टों के जेल जाने का उद्घाटन
कांग्रेसी नेता अक्सर शोर मचाते थे कि भाजपा, कांग्रेस नेताओं पर भ्रष्टाचार और घोटालों के झूठे आरोप लगाकर बदनाम करती है। भाजपा के आरोप सही हैं तो वह अब तक हमारे किसी नेता को गिरफ्तार कर जेल नहीं भेजती।1 बेटी शीना बोरा की हत्यारोपी इंद्राणी मुखर्जी के बयान से पी चिंदबरम संकट में
2 आईएनएक्स मीडिया की प्रमोटर इंद्राणी मुखर्जी सरकारी गवाह बनी
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, उनका बेटा राहुल गांधी, दामाद राबर्ट वाड्रा के साथ दिल्ली, राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तराखंड तक के सीनियर कांग्रेसी लीडरों का नाम अरबों रुपये के घोटाले करने के लिए सुर्खियों में रहा है।
उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और दिग्गज कांग्रेस नेता हरीश रावत भी सीबीआई जांच के घेरे में हैं। उनके खिलाफ अप्रैल 2016 में सदन में फ्लोर टेस्ट से पहले बागी विधायकों को समर्थन के लिए घूस की पेशकश करने का आरोप है।
एफआईपीबी ने आईएनएक्स मीडिया को 2007 में वित्त मंत्री के तौर पर पी चिदंबरम के कार्यकाल में विदेश से 305 करोड़ रुपये फंड देने के लिए क्लीयरेंस में अनियमितता की गई।
कभी देश की राजनीति में चमकने वाले पूर्व केंद्रीय वित्त एवं गृह मंत्री पी चिदंबरम ने शायद कभी ख्वाब में भी नहींसोचा होगा कि जो सीबीआई और ईडी उनके इशारों पर नाचती थी वही एक दिन उन्हें गिरफ्तार भी करेगी। जिस सीबीआई मुख्यालय का निर्माण उन्होंने गृह मंत्री रहते हुए कराया था उसके आफिस में ही वह एक दिन घोटाले के आरोपी बनकर कैद होंगे। जिस सीबीआई को वह नचाते रहे हैं वही उनके आवास में जबरन दीवार लांघकर घुसेगी और हिरासत में ले लेगी, फिर गिरफ्तार करने का ऐलान करेगी, उनसे सवाल-जवाब करेगी। राजनीति में जिस ऊंचाई पर पी चिदंबरम पहुंच चुके थे वहां खड़े होकर राजनेताओं को लगने लगता है कि उनके सामने कानून, कोर्ट, पुलिस, सीबीआई, ईडी आदि सब के सब बौने हैं। इसी मुगालते में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम भी रहे, लेकिन उनकी यह गलतफहमी सीबीआई ने उन्हें गिरफ्तार कर दूर कर दी। देश के कद्दावर नेता को उसके ही घर में घुसकर गिरफ्तार किया तो घोटालेबाज राजनेताओं में खलबली मच गई। घोटालेबाजों को लगने लगा है कि अब उनका भी नंबर आ सकता है। देश की आजादी के बाद से केेंद्र की सरकार रही हो या राज्यों की सरकारें, सभी पार्टियां अपने विराधियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाती रही हैं, चुनाव के दौरान तो विरोधी पार्टियां भ्रष्ट नेताओं को जेल में डालने का शोर भी खूब मचाती रही हैं, लेकिन सत्ता हासिल होने पर विरोधी और भ्रष्ट नेताओं को जेल में ठूंसने के बजाय खुद देश और प्रदेश को लूटने में लग जाती हैं। यूपी में सपा और बसपा का यही खेल देखा जाता था, लेकिन अब देश और प्रदेशों में ऐसी पार्टी की सरकार बनी हैं जो वास्तव में भ्रष्टाचार के खिलाफ गंभीर है। घोटालेबाजों से निपटने का काम शुरू कर दिया है।
2014 में देश की सत्ता से बेदखल होने के बाद कांग्रेस के बुरे दिनों की शुरुआत हो गई। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, उनका बेटा राहुल गांधी, दामाद राबर्ट वाड्रा के साथ दिल्ली, राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तराखंड तक के सीनियर कांग्रेसी लीडरों का नाम अरबों रुपये के घोटाले करने के लिए सुर्खियों में रहा है। कांग्रेस अपने सबसे मुश्किल दौर से गुजर रही है। आईएनएक्स मीडिया केस में आईएनएक्स मीडिया की प्रमोटर इंद्राणी मुखर्जी के सरकारी गवाह बनने के बाद से चिदंबरम की मुश्किलें बढऩे लगी थीं, लेकिन वह दिल्ली हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत लेकर बचे फिर रहे थे। दरअसल जब पी चिदंबरम देश के वित्त मंत्री थे तब विदेशी निवेश की आड़ में एफआईपीबी में चल रहे खेल का खुलासा टू जी स्पेक्ट्रम घोटाले की जांच के दौरान सामने आया। इस डील में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच कर ही ईडी का ध्यान मैक्सिस से जुड़ी कंपनियों से चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम की कंपनियों में पैसे आने पर गया तो इस केस में घूसखोरी की परतें एक के बाद एक खुलती चली गईं। दरअसल आईएनएक्स मीडिया को फॉरन इंवेस्टमेंट प्रमोशन बोर्ड (एफआईपीबी) ने मई 2007 में 4.62 करोड़ रुपये के निवेश की मंजूरी दी थी। एफआईपीबी ने यह स्पष्ट कर दिया था कि कंपनी में डाउनस्ट्रीम इंवेस्टमेंट के लिए अलग से मंजूरी लेनी होगी। डाउनस्ट्रीम इंवेस्टमेंट (भारतीय कंपनी की ओर से अन्य में सब्सक्रिप्शन या शेयर्स खरीदने के जरिए इनडायरेक्ट फॉरन इंवेस्टमेंट होता है।) इसके विपरीत आईएनएक्स मीडिया ने 305 करोड़ रुपये से अधिक का फॉरन डायरेक्ट इंवेस्टमेंट हासिल कर लिया था, जबकि कंपनी को 4.62 करोड़ रुपये के इंवेस्टमेंट के लिए ही स्वीकृति मिली थी। यह सब तत्कालीन वित्त मंत्री पी चिदंबरम के कार्यकाल में हुआ था। जांच में खुलासा होने पर 15 मई 2017 को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने फॉरन इंवेस्टमेंट प्रमोशन बोर्ड (एफआईपीबी) की अनियमितता के मामले में एफआईआर दर्ज की थी। आरोप था कि एफआईपीबी ने आईएनएक्स मीडिया को 2007 में वित्त मंत्री के तौर पर पी चिदंबरम के कार्यकाल में विदेश से 305 करोड़ रुपये फंड देने के लिए क्लीयरेंस में अनियमितता की थी। एफआईआर के आधार पर प्रवर्तन निदेशालय ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया था। जांच के दौरान इंद्राणी मुखर्जी ने जांच एजेंसी को बयान दिया कि आईएनएक्स मीडिया की अर्जी फॉरेन इंवेस्टमेंट प्रमोशन बोर्ड (एफआईपीबी) के पास थी। तब वह पति पीटर मुखर्जी और कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी के साथ पूर्व वित्त मंत्री के दफ्तर नॉर्थ ब्लॉक में जाकर मिली थी। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को दिए अपने बयान में इंद्राणी ने कहा, पीटर मुखर्जी ने तत्कालीन वित्तमंत्री पी चिदंबरम से बातचीत शुरू की और आईएनएक्स मीडिया की अर्जी एफडीआई के लिए होना बताया था साथ ही अर्जी की एक प्रति भी चिदंबरम को दी थी। एफआईपीबी की मंजूरी के बदले चिदंबरम ने पीटर मुखर्जी के सामने शर्त रखी थी कि ‘उन्हें कार्ति चिदंबरम के बिजनेस में मदद करनी होगी।’ इंद्राणी के इसी बयान को ईडी ने चार्जशीट में दर्ज कर कोर्ट में सबूत पेश किया है।
आईएनएक्स मीडिया केस
15 मई 2017 आईएनएक्स मीडिया मामले में सीबीआई ने प्राथमिकी दर्ज की जिसमें इस समूह पर 2007 में विदेशों से 305 करोड़ रुपये लेने के लिए एफआईपीबी की मंजूरी हासिल करने में अनियमितता बरतने का आरोप लगाया गया।
2018 ईडी ने इस संबंध में धन शोधन का मामला दर्ज किया। सीबीआई ने पूछताछ के लिए वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व गृह मंत्री पी चिदंबरम को समन जारी किया।
30 मई 2018 चिदंबरम ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर कर सीबीआई द्वारा दर्ज भ्रष्टाचार के मामले में अग्रिम जमानत का अनुरोध किया।
23 जुलाई 2018 चिदंबरम ने प्रवर्तन निदेशालय के धन शोधन मामले में अग्रिम जमानत के लिए दिल्ली हाईकोर्ट में गुहार लगाई।
25 जुलाई 2018 दिल्ली हाईकोर्ट ने दोनों मामलों में गिरफ्तारी से उन्हें अंतरिम राहत दे दी।
25 जनवरी 2019 दिल्ली हाईकोर्ट ने दोनों ही मामलों में चिदंबरम की अग्रिम जमानत याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रखा।
20 अगस्त 2019 दिल्ली हाईकोर्ट ने चिदंबरम की अग्रिम जमानत की याचिका खारिज की। साथ ही कोर्ट ने पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री पी चिदंबरम को सुप्रीमकोर्ट का दरवाजा खटखटाने के लिए गिरफ्तारी से अंतरिम राहत देने से भी इन्कार कर दिया।
कांग्रेसी नेता अक्सर शोर मचाते थे कि भाजपा, कांग्रेस नेताओं पर भ्रष्टाचार और घोटालों के झूठे आरोप लगाकर बदनाम करती है। भाजपा के आरोप सही हैं तो वह अब तक हमारे किसी नेता को गिरफ्तार कर जेल नहीं भेजती, लेकिन अब घोटालेबाज भ्रष्ट कांग्रेस नेताओं को जेल भेजने का उद्घाटन हो गया, कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व गृह मंत्री पी चिदंबरम की गिरफ्तारी हुई तो कांग्रेसी फिर शोर मचाने लगे कि मोदी सरकार बदले की भावना से कार्रवाई कर रही है। इससे पहले भ्रष्ट नेता और झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा को अदालत तीन साल की जेल और 25 लाख रुपये का जुर्माना ठोक चुकी है। चारा घोटाले में आरजेडी मुखिया लालू यादव जेल में हैं। पी चिदंबरम कांग्रेस के पहले नेता नहीं हैं, जो भ्रष्टाचार में फंसे हुए हैं। उनके अलावा कई और कद्दावर कांग्रेसी नेता भी भ्रष्टाचार में फंसे हुए हैं। घोटालेबाज कांग्रेसी नेताओं की लिस्ट में सबसे ऊपर सोनिया गांधी, राहुल गांधी और राबर्ट वाड्रा का नाम आता है। ये सभी बेल पर बाहर हैं। इनके बाद मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के भांजे रतुल पुरी, अहमद पटेल, अशोक गहलौत और सचिन पायलट जैसे नेताओं के नाम भी लिस्ट में शामिल हैं। लोकसभा चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अक्सर शीर्ष नेताओं के जमानत पर बाहर होने, जेल के दरवाजे तक पहुंचाने और अंदर पहुंचाने जैसी चुटकी अपने भाषणों में लेते रहते थे। क्योंकि मोदी सरकार अपने पहले कालखंड में भ्रष्ट कांग्रेस नेताओं की कुंडली खंगाल चुकी थी। दिल्ली से लेकर हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र तक के बड़े कांग्रेस नेता सीबीआई, इनकम टैक्स और ईडी जैसी एजेंसियों के निशाने पर हैं। सीबीआई, इनकम टैक्स और ईडी जैसी एजेंसियां अब चिदंबरम के अलावा इन नेताओं पर कभी भी शिकंजा कस सकती हैं।
2011 का नेशनल हेराल्ड केस
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, उनके बेटे राहुल गांधी और अन्य कांग्रेस नेता इस मामले में फंसे हुए हैं। आरोप है कि गांधी परिवार ने हेराल्ड की संपत्ति का अवैध ढंग से इस्तेमाल किया है। इस मामले को लेकर सुब्रह्मïण्यम स्वामी 2012 में कोर्ट गए थे। कोर्ट ने लंबी सुनवाई के बाद 26 जून 2014 को दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने सोनिया गांधी, राहुल गांधी के अलावा मोतीलाल वोरा, सुमन दुबे और सैम पित्रोदा को तलब किया था। सुब्रह्मïण्यम स्वामी ने आरोप लगाया था कि सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने कांग्रेस पार्टी से लोन देने के नाम पर नेशनल हेराल्ड की दो हजार करोड़ रुपये की संपत्ति हड़प कर ली है। इसके बाद पांच लाख रुपये से यंग इंडिया कंपनी बनाई, जिसमें सोनिया और राहुल की 38-38 प्रतिशत हिस्सेदारी है। शेष हिस्सेदारी कांग्रेस नेता मोतीलाल वोरा और ऑस्कर फर्नांडिस के पास रही। अगस्ता वेस्टलैंड वीआईपी हेलीकॉप्टर घोटाला यह 2013-14 में सामने आया। इसमें कई राजनेताओं एवं सैन्य अधिकारियों पर अगस्ता वेस्टलैंड से मोटी घूस लेने का आरोप है। इस मामले में अहमद पटेल और कमलनाथ के भांजे रतुल पुरी फंसे हैं।
अगस्ता वेस्टलैंड का सौदा 3,600 करोड़ रुपये का था। जिसमें 360 करोड़ रुपये के घोटाले की बात सामने आई।
एंबुलेस घोटाला
एंबुलेस घोटाला में राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलौत और उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट फंसे हुए हैं। इसे 2010 से 2013 के बीच अंजाम दिया गया था। एंबुलेंस खरीदने के लिए जो टेंडर जारी किया गया था, उसमें गड़बड़ी की गई थी। 31 जुलाई 2014 को जयपुर के अशोक नगर थाने में जयपुर नगर निगम के पूर्व मेयर पंकज जोशी की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया था। करोड़ों की एंबुलेंस खरीद में पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम के पुत्र कार्ति चिदंबरम, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलौत, पूर्व स्वास्थ्य मंत्री एए खान, श्वेता मंगल, शफी माथेर और निदेशक एनआरएचएम के विरुद्ध आईपीसी की धारा 420 (धोखाधड़ी), 467 (जालसाजी), 468 (धोखाधड़ी के लिए जालसाजी), 471, और 120 (बी) के तहत मामला दर्ज किया गया था। ईडी अब तक 12 करोड़ की संपत्तियां आरोपियों से जब्त कर चुका है।
उत्तराखंड के हरीश रावत घोटाले में भी शामिल
उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और दिग्गज कांग्रेस नेता हरीश रावत भी सीबीआई जांच के घेरे में हैं। उनके खिलाफ अप्रैल 2016 में सदन में फ्लोर टेस्ट से पहले बागी विधायकों को समर्थन के लिए घूस की पेशकश करने का आरोप है। हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता वीरभद्र सिंह पर भी केंद्रीय एजेंसियों की तलवार लटकी हुई है। उनके खिलाफ केंद्रीय एजेंसियों की जांच अभी भी चल रही है। वीरभद्र सिंह पर भी आय से अधिक संपत्ति रखने का मामला दर्ज है। सीबीआई ने सितंबर 2015 में सिंह की बेटी की शादी के दिन ही घर पर छापेमारी की थी। हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भूपिंदर सिंह हुड्डा भी भ्रष्टाचार के मामले में फंसे हुए हैं। उनके खिलाफ गुरुग्राम में जमीन सौदे के मामले में केस दर्ज है। कर्नाटक कांग्रेस के दिग्गज नेता डीके शिवकुमार पर आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज है। डीके शिवकुमार के 64 ठिकानों पर इनकम टैक्स ने 2017 में छापेमारी की थी।
कौन है इंद्राणी मुखर्जी
जिस इंद्राणी मुखर्जी के बयान से पी चिंदबरम संकट में हैं, वह इस समय अपनी ही बेटी शीना बोरा की हत्या के इल्जाम में सलाखों के पीछे है। शीना बोरा की हत्या 2012 में हुई थी। हत्या के बाद उसका शव जंगल में दफना दिया गया। शीना की हत्या का खुलासा उस समय हुआ जब पुलिस ने 2015 में इंद्राणी मुखर्जी के ड्राइवर को गिरफ्तार किया था। तभी पुलिस को पता चला कि इंद्राणी ने अपने पूर्व पति के साथ मिलकर अपनी बेटी की हत्या कर दी और लाश ठिकाने लगा दी। जांच में पता चला कि शीना की हत्या इसलिए की गई क्योंकि वह इंद्राणी को ब्लैकमेल कर रही थी। इसके अलावा शीना के पीटर के बेटे राहुल से संबंध होने की भी बात सामने आई थी। इंद्राणी ने पूछताछ के दौरान इस बात का खुलासा किया था कि शीना उनकी बेटी थी, जबकि उसने अपने पति पीटर मुखर्जी को बहन बता रखा था। इसी राज को राज रखने के लिए शीना उसे ब्लैकमेल करती थी।
कांग्रेसियों में बौखलाहट
अपने दिग्गज नेता पी चिदंबरम की गिरफ्तारी से कांग्रेसी बौखला गए हैं। वे यह नहींसमझ पा रहे कि क्या करें क्या न करें? इसी बौखलाहट में कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल प्रेस कांफ्रेंस में कह बैठे कि चुनाव आते जाते रहते हैं, सरकारें बनती बिगड़ती रहती हैं, पीएम मोदी से वफादारी करने वाले ब्यूरोकेट पर हमारी भी नजर है। कपिल सिब्बल एक तरह से अधिकारियों को धमका रहे थे कि भविष्य में उनकी सरकार बनेगी तो निपट लेंगे।
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भ्रष्टों के जेल जाने का उद्घाटन
कांग्रेसी नेता अक्सर शोर मचाते थे कि भाजपा, कांग्रेस नेताओं पर भ्रष्टाचार और घोटालों के झूठे आरोप लगाकर बदनाम करती है। भाजपा के आरोप सही हैं तो वह अब तक हमारे किसी नेता को गिरफ्तार कर जेल नहीं भेजती।1 बेटी शीना बोरा की हत्यारोपी इंद्राणी मुखर्जी के बयान से पी चिंदबरम संकट में
2 आईएनएक्स मीडिया की प्रमोटर इंद्राणी मुखर्जी सरकारी गवाह बनी
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, उनका बेटा राहुल गांधी, दामाद राबर्ट वाड्रा के साथ दिल्ली, राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तराखंड तक के सीनियर कांग्रेसी लीडरों का नाम अरबों रुपये के घोटाले करने के लिए सुर्खियों में रहा है।
उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और दिग्गज कांग्रेस नेता हरीश रावत भी सीबीआई जांच के घेरे में हैं। उनके खिलाफ अप्रैल 2016 में सदन में फ्लोर टेस्ट से पहले बागी विधायकों को समर्थन के लिए घूस की पेशकश करने का आरोप है।
एफआईपीबी ने आईएनएक्स मीडिया को 2007 में वित्त मंत्री के तौर पर पी चिदंबरम के कार्यकाल में विदेश से 305 करोड़ रुपये फंड देने के लिए क्लीयरेंस में अनियमितता की गई।
कभी देश की राजनीति में चमकने वाले पूर्व केंद्रीय वित्त एवं गृह मंत्री पी चिदंबरम ने शायद कभी ख्वाब में भी नहींसोचा होगा कि जो सीबीआई और ईडी उनके इशारों पर नाचती थी वही एक दिन उन्हें गिरफ्तार भी करेगी। जिस सीबीआई मुख्यालय का निर्माण उन्होंने गृह मंत्री रहते हुए कराया था उसके आफिस में ही वह एक दिन घोटाले के आरोपी बनकर कैद होंगे। जिस सीबीआई को वह नचाते रहे हैं वही उनके आवास में जबरन दीवार लांघकर घुसेगी और हिरासत में ले लेगी, फिर गिरफ्तार करने का ऐलान करेगी, उनसे सवाल-जवाब करेगी। राजनीति में जिस ऊंचाई पर पी चिदंबरम पहुंच चुके थे वहां खड़े होकर राजनेताओं को लगने लगता है कि उनके सामने कानून, कोर्ट, पुलिस, सीबीआई, ईडी आदि सब के सब बौने हैं। इसी मुगालते में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम भी रहे, लेकिन उनकी यह गलतफहमी सीबीआई ने उन्हें गिरफ्तार कर दूर कर दी। देश के कद्दावर नेता को उसके ही घर में घुसकर गिरफ्तार किया तो घोटालेबाज राजनेताओं में खलबली मच गई। घोटालेबाजों को लगने लगा है कि अब उनका भी नंबर आ सकता है। देश की आजादी के बाद से केेंद्र की सरकार रही हो या राज्यों की सरकारें, सभी पार्टियां अपने विराधियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाती रही हैं, चुनाव के दौरान तो विरोधी पार्टियां भ्रष्ट नेताओं को जेल में डालने का शोर भी खूब मचाती रही हैं, लेकिन सत्ता हासिल होने पर विरोधी और भ्रष्ट नेताओं को जेल में ठूंसने के बजाय खुद देश और प्रदेश को लूटने में लग जाती हैं। यूपी में सपा और बसपा का यही खेल देखा जाता था, लेकिन अब देश और प्रदेशों में ऐसी पार्टी की सरकार बनी हैं जो वास्तव में भ्रष्टाचार के खिलाफ गंभीर है। घोटालेबाजों से निपटने का काम शुरू कर दिया है।
2014 में देश की सत्ता से बेदखल होने के बाद कांग्रेस के बुरे दिनों की शुरुआत हो गई। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, उनका बेटा राहुल गांधी, दामाद राबर्ट वाड्रा के साथ दिल्ली, राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तराखंड तक के सीनियर कांग्रेसी लीडरों का नाम अरबों रुपये के घोटाले करने के लिए सुर्खियों में रहा है। कांग्रेस अपने सबसे मुश्किल दौर से गुजर रही है। आईएनएक्स मीडिया केस में आईएनएक्स मीडिया की प्रमोटर इंद्राणी मुखर्जी के सरकारी गवाह बनने के बाद से चिदंबरम की मुश्किलें बढऩे लगी थीं, लेकिन वह दिल्ली हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत लेकर बचे फिर रहे थे। दरअसल जब पी चिदंबरम देश के वित्त मंत्री थे तब विदेशी निवेश की आड़ में एफआईपीबी में चल रहे खेल का खुलासा टू जी स्पेक्ट्रम घोटाले की जांच के दौरान सामने आया। इस डील में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच कर ही ईडी का ध्यान मैक्सिस से जुड़ी कंपनियों से चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम की कंपनियों में पैसे आने पर गया तो इस केस में घूसखोरी की परतें एक के बाद एक खुलती चली गईं। दरअसल आईएनएक्स मीडिया को फॉरन इंवेस्टमेंट प्रमोशन बोर्ड (एफआईपीबी) ने मई 2007 में 4.62 करोड़ रुपये के निवेश की मंजूरी दी थी। एफआईपीबी ने यह स्पष्ट कर दिया था कि कंपनी में डाउनस्ट्रीम इंवेस्टमेंट के लिए अलग से मंजूरी लेनी होगी। डाउनस्ट्रीम इंवेस्टमेंट (भारतीय कंपनी की ओर से अन्य में सब्सक्रिप्शन या शेयर्स खरीदने के जरिए इनडायरेक्ट फॉरन इंवेस्टमेंट होता है।) इसके विपरीत आईएनएक्स मीडिया ने 305 करोड़ रुपये से अधिक का फॉरन डायरेक्ट इंवेस्टमेंट हासिल कर लिया था, जबकि कंपनी को 4.62 करोड़ रुपये के इंवेस्टमेंट के लिए ही स्वीकृति मिली थी। यह सब तत्कालीन वित्त मंत्री पी चिदंबरम के कार्यकाल में हुआ था। जांच में खुलासा होने पर 15 मई 2017 को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने फॉरन इंवेस्टमेंट प्रमोशन बोर्ड (एफआईपीबी) की अनियमितता के मामले में एफआईआर दर्ज की थी। आरोप था कि एफआईपीबी ने आईएनएक्स मीडिया को 2007 में वित्त मंत्री के तौर पर पी चिदंबरम के कार्यकाल में विदेश से 305 करोड़ रुपये फंड देने के लिए क्लीयरेंस में अनियमितता की थी। एफआईआर के आधार पर प्रवर्तन निदेशालय ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया था। जांच के दौरान इंद्राणी मुखर्जी ने जांच एजेंसी को बयान दिया कि आईएनएक्स मीडिया की अर्जी फॉरेन इंवेस्टमेंट प्रमोशन बोर्ड (एफआईपीबी) के पास थी। तब वह पति पीटर मुखर्जी और कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी के साथ पूर्व वित्त मंत्री के दफ्तर नॉर्थ ब्लॉक में जाकर मिली थी। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को दिए अपने बयान में इंद्राणी ने कहा, पीटर मुखर्जी ने तत्कालीन वित्तमंत्री पी चिदंबरम से बातचीत शुरू की और आईएनएक्स मीडिया की अर्जी एफडीआई के लिए होना बताया था साथ ही अर्जी की एक प्रति भी चिदंबरम को दी थी। एफआईपीबी की मंजूरी के बदले चिदंबरम ने पीटर मुखर्जी के सामने शर्त रखी थी कि ‘उन्हें कार्ति चिदंबरम के बिजनेस में मदद करनी होगी।’ इंद्राणी के इसी बयान को ईडी ने चार्जशीट में दर्ज कर कोर्ट में सबूत पेश किया है।
आईएनएक्स मीडिया केस
15 मई 2017 आईएनएक्स मीडिया मामले में सीबीआई ने प्राथमिकी दर्ज की जिसमें इस समूह पर 2007 में विदेशों से 305 करोड़ रुपये लेने के लिए एफआईपीबी की मंजूरी हासिल करने में अनियमितता बरतने का आरोप लगाया गया।2018 ईडी ने इस संबंध में धन शोधन का मामला दर्ज किया। सीबीआई ने पूछताछ के लिए वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व गृह मंत्री पी चिदंबरम को समन जारी किया।
30 मई 2018 चिदंबरम ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर कर सीबीआई द्वारा दर्ज भ्रष्टाचार के मामले में अग्रिम जमानत का अनुरोध किया।
23 जुलाई 2018 चिदंबरम ने प्रवर्तन निदेशालय के धन शोधन मामले में अग्रिम जमानत के लिए दिल्ली हाईकोर्ट में गुहार लगाई।
25 जुलाई 2018 दिल्ली हाईकोर्ट ने दोनों मामलों में गिरफ्तारी से उन्हें अंतरिम राहत दे दी।
25 जनवरी 2019 दिल्ली हाईकोर्ट ने दोनों ही मामलों में चिदंबरम की अग्रिम जमानत याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रखा।
20 अगस्त 2019 दिल्ली हाईकोर्ट ने चिदंबरम की अग्रिम जमानत की याचिका खारिज की। साथ ही कोर्ट ने पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री पी चिदंबरम को सुप्रीमकोर्ट का दरवाजा खटखटाने के लिए गिरफ्तारी से अंतरिम राहत देने से भी इन्कार कर दिया।
कांग्रेसी नेता अक्सर शोर मचाते थे कि भाजपा, कांग्रेस नेताओं पर भ्रष्टाचार और घोटालों के झूठे आरोप लगाकर बदनाम करती है। भाजपा के आरोप सही हैं तो वह अब तक हमारे किसी नेता को गिरफ्तार कर जेल नहीं भेजती, लेकिन अब घोटालेबाज भ्रष्ट कांग्रेस नेताओं को जेल भेजने का उद्घाटन हो गया, कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व गृह मंत्री पी चिदंबरम की गिरफ्तारी हुई तो कांग्रेसी फिर शोर मचाने लगे कि मोदी सरकार बदले की भावना से कार्रवाई कर रही है। इससे पहले भ्रष्ट नेता और झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा को अदालत तीन साल की जेल और 25 लाख रुपये का जुर्माना ठोक चुकी है। चारा घोटाले में आरजेडी मुखिया लालू यादव जेल में हैं। पी चिदंबरम कांग्रेस के पहले नेता नहीं हैं, जो भ्रष्टाचार में फंसे हुए हैं। उनके अलावा कई और कद्दावर कांग्रेसी नेता भी भ्रष्टाचार में फंसे हुए हैं। घोटालेबाज कांग्रेसी नेताओं की लिस्ट में सबसे ऊपर सोनिया गांधी, राहुल गांधी और राबर्ट वाड्रा का नाम आता है। ये सभी बेल पर बाहर हैं। इनके बाद मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के भांजे रतुल पुरी, अहमद पटेल, अशोक गहलौत और सचिन पायलट जैसे नेताओं के नाम भी लिस्ट में शामिल हैं। लोकसभा चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अक्सर शीर्ष नेताओं के जमानत पर बाहर होने, जेल के दरवाजे तक पहुंचाने और अंदर पहुंचाने जैसी चुटकी अपने भाषणों में लेते रहते थे। क्योंकि मोदी सरकार अपने पहले कालखंड में भ्रष्ट कांग्रेस नेताओं की कुंडली खंगाल चुकी थी। दिल्ली से लेकर हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र तक के बड़े कांग्रेस नेता सीबीआई, इनकम टैक्स और ईडी जैसी एजेंसियों के निशाने पर हैं। सीबीआई, इनकम टैक्स और ईडी जैसी एजेंसियां अब चिदंबरम के अलावा इन नेताओं पर कभी भी शिकंजा कस सकती हैं।
2011 का नेशनल हेराल्ड केस
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, उनके बेटे राहुल गांधी और अन्य कांग्रेस नेता इस मामले में फंसे हुए हैं। आरोप है कि गांधी परिवार ने हेराल्ड की संपत्ति का अवैध ढंग से इस्तेमाल किया है। इस मामले को लेकर सुब्रह्मïण्यम स्वामी 2012 में कोर्ट गए थे। कोर्ट ने लंबी सुनवाई के बाद 26 जून 2014 को दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने सोनिया गांधी, राहुल गांधी के अलावा मोतीलाल वोरा, सुमन दुबे और सैम पित्रोदा को तलब किया था। सुब्रह्मïण्यम स्वामी ने आरोप लगाया था कि सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने कांग्रेस पार्टी से लोन देने के नाम पर नेशनल हेराल्ड की दो हजार करोड़ रुपये की संपत्ति हड़प कर ली है। इसके बाद पांच लाख रुपये से यंग इंडिया कंपनी बनाई, जिसमें सोनिया और राहुल की 38-38 प्रतिशत हिस्सेदारी है। शेष हिस्सेदारी कांग्रेस नेता मोतीलाल वोरा और ऑस्कर फर्नांडिस के पास रही। अगस्ता वेस्टलैंड वीआईपी हेलीकॉप्टर घोटाला यह 2013-14 में सामने आया। इसमें कई राजनेताओं एवं सैन्य अधिकारियों पर अगस्ता वेस्टलैंड से मोटी घूस लेने का आरोप है। इस मामले में अहमद पटेल और कमलनाथ के भांजे रतुल पुरी फंसे हैं।अगस्ता वेस्टलैंड का सौदा 3,600 करोड़ रुपये का था। जिसमें 360 करोड़ रुपये के घोटाले की बात सामने आई।
एंबुलेस घोटाला
एंबुलेस घोटाला में राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलौत और उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट फंसे हुए हैं। इसे 2010 से 2013 के बीच अंजाम दिया गया था। एंबुलेंस खरीदने के लिए जो टेंडर जारी किया गया था, उसमें गड़बड़ी की गई थी। 31 जुलाई 2014 को जयपुर के अशोक नगर थाने में जयपुर नगर निगम के पूर्व मेयर पंकज जोशी की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया था। करोड़ों की एंबुलेंस खरीद में पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम के पुत्र कार्ति चिदंबरम, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलौत, पूर्व स्वास्थ्य मंत्री एए खान, श्वेता मंगल, शफी माथेर और निदेशक एनआरएचएम के विरुद्ध आईपीसी की धारा 420 (धोखाधड़ी), 467 (जालसाजी), 468 (धोखाधड़ी के लिए जालसाजी), 471, और 120 (बी) के तहत मामला दर्ज किया गया था। ईडी अब तक 12 करोड़ की संपत्तियां आरोपियों से जब्त कर चुका है।उत्तराखंड के हरीश रावत घोटाले में भी शामिल
उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और दिग्गज कांग्रेस नेता हरीश रावत भी सीबीआई जांच के घेरे में हैं। उनके खिलाफ अप्रैल 2016 में सदन में फ्लोर टेस्ट से पहले बागी विधायकों को समर्थन के लिए घूस की पेशकश करने का आरोप है। हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता वीरभद्र सिंह पर भी केंद्रीय एजेंसियों की तलवार लटकी हुई है। उनके खिलाफ केंद्रीय एजेंसियों की जांच अभी भी चल रही है। वीरभद्र सिंह पर भी आय से अधिक संपत्ति रखने का मामला दर्ज है। सीबीआई ने सितंबर 2015 में सिंह की बेटी की शादी के दिन ही घर पर छापेमारी की थी। हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भूपिंदर सिंह हुड्डा भी भ्रष्टाचार के मामले में फंसे हुए हैं। उनके खिलाफ गुरुग्राम में जमीन सौदे के मामले में केस दर्ज है। कर्नाटक कांग्रेस के दिग्गज नेता डीके शिवकुमार पर आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज है। डीके शिवकुमार के 64 ठिकानों पर इनकम टैक्स ने 2017 में छापेमारी की थी।कौन है इंद्राणी मुखर्जी
जिस इंद्राणी मुखर्जी के बयान से पी चिंदबरम संकट में हैं, वह इस समय अपनी ही बेटी शीना बोरा की हत्या के इल्जाम में सलाखों के पीछे है। शीना बोरा की हत्या 2012 में हुई थी। हत्या के बाद उसका शव जंगल में दफना दिया गया। शीना की हत्या का खुलासा उस समय हुआ जब पुलिस ने 2015 में इंद्राणी मुखर्जी के ड्राइवर को गिरफ्तार किया था। तभी पुलिस को पता चला कि इंद्राणी ने अपने पूर्व पति के साथ मिलकर अपनी बेटी की हत्या कर दी और लाश ठिकाने लगा दी। जांच में पता चला कि शीना की हत्या इसलिए की गई क्योंकि वह इंद्राणी को ब्लैकमेल कर रही थी। इसके अलावा शीना
के पीटर के बेटे राहुल से संबंध होने की भी बात सामने आई थी। इंद्राणी ने पूछताछ के दौरान इस बात का खुलासा किया था कि शीना उनकी बेटी थी, जबकि उसने अपने पति पीटर मुखर्जी को बहन बता रखा था। इसी राज को राज रखने के लिए शीना उसे ब्लैकमेल करती थी।
के पीटर के बेटे राहुल से संबंध होने की भी बात सामने आई थी। इंद्राणी ने पूछताछ के दौरान इस बात का खुलासा किया था कि शीना उनकी बेटी थी, जबकि उसने अपने पति पीटर मुखर्जी को बहन बता रखा था। इसी राज को राज रखने के लिए शीना उसे ब्लैकमेल करती थी।
कांग्रेसियों में बौखलाहट
अपने दिग्गज नेता पी चिदंबरम की गिरफ्तारी से कांग्रेसी बौखला गए हैं। वे यह नहींसमझ पा रहे कि क्या करें क्या न करें? इसी बौखलाहट में कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल प्रेस कांफ्रेंस में कह बैठे कि चुनाव आते जाते रहते हैं, सरकारें बनती बिगड़ती रहती हैं, पीएम मोदी से वफादारी करने वाले ब्यूरोकेट पर हमारी भी नजर है। कपिल सिब्बल एक तरह से अधिकारियों को धमका रहे थे कि भविष्य में उनकी सरकार बनेगी तो निपट लेंगे।के के चौहान
गुरुवार, 8 अगस्त 2019
मोदी का दम धारा 370 बेदम
N0. One Patrika uttranchal deep
8881788066
मोदी का दम
धारा 370 बेदम
उत्तराखंड के अनिल बलूनी और भूपेंद्र यादव की टीम ने जम्मू-कश्मीर मिशन फतह करने के लिए राज्यसभा में जुटाया जादुई आकंड़ा।
‘जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने और केेंद्र शासित राज्य का दर्जा दिलाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने अपने विश्वासपात्रों की टीम बनाई, इसमें न केवल कानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद, एनएसए अजित डोभाल, उत्तराखंड के राज्यसभा सदस्य अनिल बलूनी और भूपेंद्र यादव को शामिल किया गया बल्कि आईएएस अफसरों के साथ कानून के जानकारों को टीम का हिस्सा बनाया गया था। गृह मंत्री ने प्रमुख पत्रकारों के साथ बैठक कर वचन ले लिया था कि वे जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने की गोपनियता को तब तक भंग न करें जब तक कि इसे सदन के पटल पर न रख दिया जाए।’
जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने और राज्य के टुकड़े करने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मिशन की शुरुआत तो जून के तीसरे हफ्ते में ही हो गई थी, जब उन्होंने छत्तीसगढ़ कैडर के 1987 बैच के आईएएस बीवीआर सुब्रमण्यम को जम्मू-कश्मीर का नया मुख्य सचिव नियुक्त किया था। सुब्रमण्यम पीएमओ (प्रधानमंत्री कार्यालय) में संयुक्त सचिव के रूप में पहले भी प्रधानमंत्री के साथ काम कर चुके हैं। वह मोदी के मिशन कश्मीर के मुख्य अधिकारियों में से रहे। मिशन कश्मीर का सारा काम केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को दिया गया था, जो कानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद के साथ मिलकर अपनी कोर टीम के साथ कानून निहितार्थ की समीक्षा कर रहे थे, जिसमें कानून और न्याय सचिव आलोक श्रीवास्तव, अतिरिक्त सचिव कानून (गृह मंत्रालय) आरएस वर्मा, अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल, केंद्रीय गृह सचिव राजीव गौबा और कश्मीर खंड की उनकी चुनी हुई टीम शामिल थी।
शाह ने बजट सत्र की शुरुआत से पहले ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत और उनके सहयोगी (महासचिव) भैयाजी जोशी को अनुच्छेद 370 को हटाने और जम्मू-कश्मीर को दो अलग केंद्रशासित प्रदेशों में बांटने के केंद्र सरकार की योजना से अवगत करा दिया था। कानूनी सलाह-मशविरे के बाद शाह का ध्यान अनुच्छेद 370 हटाने और इसकी घाटी में प्रतिक्रिया के साथ कानून-व्यवस्था को संभालने पर था। शाह से जुड़े एक सूत्र का कहना है कि प्रधानमंत्री की सलाह पर शाह ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजित डोभाल के साथ कई दौर की बैठक की।
डोभाल ने श्रीनगर में मोर्चा संभाला
गृह मंत्री अमित शाह ने खुद कश्मीर के हालात की समीक्षा करने के बाद डोभाल को सुरक्षा की दृष्टि से स्थिति की समीक्षा करने के लिए श्रीनगर भेजा था। एनएसए ने वहां तीन दिन तक डेरा डाला। डोभाल के दिल्ली लौटने पर जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों की 100 कंपनी भेजने का फैसला हुआ और 26 जुलाई को अमरनाथ यात्रा रोकने का निर्णय हुआ। घाटी से सभी पर्यटकों के साथ बाहरी लोगों को निकालने की सलाह डोभाल ने ही दी।
सुब्रमण्यम ने बनाई योजना
जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव सुब्रमण्यम लगातार, प्रधानमंत्री कार्यालय और गृह मंत्रालय के संपर्क में रहे, उन्होंने ग्राउंड जीरो पर कई सुरक्षा कदम उठाने का खाका तैयार किया, जिसमें पुलिस, अद्र्धसैनिक बलों और प्रशासन के प्रमुख अधिकारियों द्वारा सैटेलाइट फोन का प्रयोग करने, संवेदनशील शहरी और ग्रामीण इलाकों में क्यूआरटी (क्विक रेस्पांस टीम) को तैनात कराया। साथ ही सेना को नियंत्रण रेखा पर चौकसी बढ़ाने के निर्देश दिए। सेना, सुरक्षा एजेंसियों और केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के प्रमुख केंद्रीय गृह मंत्रालय और राज्य के मुख्य सचिव के साथ चौबीसों घंटे संपर्क में थे।
जम्मू-कश्मीर में धारा 144
चार अगस्त की महत्वपूर्ण रात मुख्य सचिव ने पुलिस महानिदेशक (जम्मू एवं कश्मीर) दिलबाग सिंह को कई निवारक कदम उठाने के निर्देश दिए, जिनमें प्रमुख नेताओं की गिरफ्तारी, मोबाइल और लैंडलाइन सेवाएं बंद करने, धारा 144 लागू करने तथा घाटी में कफ्र्यू के दौरान सुरक्षा बलों की गश्त बढ़ाना शामिल था।
सांसद अनिल बलूनी व भूपेंद्र यादव का रोल
मिशन जम्मू-कश्मीर फतह करने के में उत्तराखंड के राज्यसभा सदस्य अनिल बलूनी और भूपेंद्र यादव का योगदान भी कम नहींरहा है। क्योंकि गृह मंत्री अमित शाह ने इन्हें अपनी टीम का हिस्सा बनाकर उच्च सदन (राज्यसभा) में सदस्यों का समर्थन जुटाने का काम सौंपा गया था। राज्यसभा में भाजपा के पास बहुमत नहीं है। राज्यसभा सदस्य अनिल बलूनी और भूपेंद्र यादव ने टीडीपी के राज्यसभा सदस्यों को तोड़ा और समाजवादी पार्टी के सांसद नीरज शेखर, सुरेंद्र नागर, संजय सेठ और कांग्रेस सांसद सजय सिंह को राज्यसभा से इस्तीफा दिलवाने का प्रबंध किया। इसके बाद भाजपा को उच्च सदन में काफी बल मिला। सबसे आखिर में टीम बसपा (बहुजन समाज पार्टी) के नेता सतीश मिश्रा का समर्थन हासिल करने में कामयाबी पाई।
पत्रकारों को हिदायत
गृहमंत्री अमित शाह ने प्रमुख पत्रकारों (जिनकी गृह मंत्रालय तक पहुंच थी) के साथ भी बंद कमरे में बैठक की और अति संवेदनशील मुद्दों पर संतुलित रिपोर्टिग करने की हिदायत दी। शाह का मुख्य जोर शीर्ष स्तर की गोपनियता बरकरार रखने पर थी, जब तक कि वे पांच अगस्त को इस विधेयक को राज्यसभा के पटल पर पेश नहीं करते। दो अगस्त को शाह को भरोसा हो गया कि उनकी पार्टी को राज्यसभा में पर्याप्त समर्थन हासिल हो गया है और सोमवार को उच्च सदन में इस ऐतिहासिक विधेयक (जम्मू-कश्मीर के टुकड़े करने) को पेश किया गया। इस दौरान भाजपा सांसदों को व्हिप जारी किया गया था कि वे संसद में उपस्थित रहें, जहां महत्वपूर्ण विधेयक पारित किए जाने हैं।
राष्ट्रपति को भी भरोसे में लिया
नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने सोमवार को मंत्रिमंडल की बैठक बुलाने और मंत्रियों को मिशन कश्मीर की जानकारी देने का फैसला किया। सदन से पहले इस संबंध में एक प्रस्ताव पारित किया गया। इसी तरह, कानून और न्याय मंत्रालय को अनुच्छेद 370 निरस्त करने की अधिसूचना राष्ट्रपति से जल्द जारी करवाने का काम सौंपा गया। राज्यसभा में शोर-शराबे के बीच सोमवार को अमित शाह ने जब विधेयक पेश किया, तो भाजपा के एक सांसद ने प्रतिक्रिया की कि शाह का मिशन कभी नाकामयाब नहीं होता।
8881788066
मोदी का दम
धारा 370 बेदम
उत्तराखंड के अनिल बलूनी और भूपेंद्र यादव की टीम ने जम्मू-कश्मीर मिशन फतह करने के लिए राज्यसभा में जुटाया जादुई आकंड़ा।
‘जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने और केेंद्र शासित राज्य का दर्जा दिलाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने अपने विश्वासपात्रों की टीम बनाई, इसमें न केवल कानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद, एनएसए अजित डोभाल, उत्तराखंड के राज्यसभा सदस्य अनिल बलूनी और भूपेंद्र यादव को शामिल किया गया बल्कि आईएएस अफसरों के साथ कानून के जानकारों को टीम का हिस्सा बनाया गया था। गृह मंत्री ने प्रमुख पत्रकारों के साथ बैठक कर वचन ले लिया था कि वे जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने की गोपनियता को तब तक भंग न करें जब तक कि इसे सदन के पटल पर न रख दिया जाए।’
जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने और राज्य के टुकड़े करने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मिशन की शुरुआत तो जून के तीसरे हफ्ते में ही हो गई थी, जब उन्होंने छत्तीसगढ़ कैडर के 1987 बैच के आईएएस बीवीआर सुब्रमण्यम को जम्मू-कश्मीर का नया मुख्य सचिव नियुक्त किया था। सुब्रमण्यम पीएमओ (प्रधानमंत्री कार्यालय) में संयुक्त सचिव के रूप में पहले भी प्रधानमंत्री के साथ काम कर चुके हैं। वह मोदी के मिशन कश्मीर के मुख्य अधिकारियों में से रहे। मिशन कश्मीर का सारा काम केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को दिया गया था, जो कानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद के साथ मिलकर अपनी कोर टीम के साथ कानून निहितार्थ की समीक्षा कर रहे थे, जिसमें कानून और न्याय सचिव आलोक श्रीवास्तव, अतिरिक्त सचिव कानून (गृह मंत्रालय) आरएस वर्मा, अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल, केंद्रीय गृह सचिव राजीव गौबा और कश्मीर खंड की उनकी चुनी हुई टीम शामिल थी।
शाह ने बजट सत्र की शुरुआत से पहले ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत और उनके सहयोगी (महासचिव) भैयाजी जोशी को अनुच्छेद 370 को हटाने और जम्मू-कश्मीर को दो अलग केंद्रशासित प्रदेशों में बांटने के केंद्र सरकार की योजना से अवगत करा दिया था। कानूनी सलाह-मशविरे के बाद शाह का ध्यान अनुच्छेद 370 हटाने और इसकी घाटी में प्रतिक्रिया के साथ कानून-व्यवस्था को संभालने पर था। शाह से जुड़े एक सूत्र का कहना है कि प्रधानमंत्री की सलाह पर शाह ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजित डोभाल के साथ कई दौर की बैठक की।
डोभाल ने श्रीनगर में मोर्चा संभाला
गृह मंत्री अमित शाह ने खुद कश्मीर के हालात की समीक्षा करने के बाद डोभाल को सुरक्षा की दृष्टि से स्थिति की समीक्षा करने के लिए श्रीनगर भेजा था। एनएसए ने वहां तीन दिन तक डेरा डाला। डोभाल के दिल्ली लौटने पर जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों की 100 कंपनी भेजने का फैसला हुआ और 26 जुलाई को अमरनाथ यात्रा रोकने का निर्णय हुआ। घाटी से सभी पर्यटकों के साथ बाहरी लोगों को निकालने की सलाह डोभाल ने ही दी।
सुब्रमण्यम ने बनाई योजना
जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव सुब्रमण्यम लगातार, प्रधानमंत्री कार्यालय और गृह मंत्रालय के संपर्क में रहे, उन्होंने ग्राउंड जीरो पर कई सुरक्षा कदम उठाने का खाका तैयार किया, जिसमें पुलिस, अद्र्धसैनिक बलों और प्रशासन के प्रमुख अधिकारियों द्वारा सैटेलाइट फोन का प्रयोग करने, संवेदनशील शहरी और ग्रामीण इलाकों में क्यूआरटी (क्विक रेस्पांस टीम) को तैनात कराया। साथ ही सेना को नियंत्रण रेखा पर चौकसी बढ़ाने के निर्देश दिए। सेना, सुरक्षा एजेंसियों और केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के प्रमुख केंद्रीय गृह मंत्रालय और राज्य के मुख्य सचिव के साथ चौबीसों घंटे संपर्क में थे।
जम्मू-कश्मीर में धारा 144
चार अगस्त की महत्वपूर्ण रात मुख्य सचिव ने पुलिस महानिदेशक (जम्मू एवं कश्मीर) दिलबाग सिंह को कई निवारक कदम उठाने के निर्देश दिए, जिनमें प्रमुख नेताओं की गिरफ्तारी, मोबाइल और लैंडलाइन सेवाएं बंद करने, धारा 144 लागू करने तथा घाटी में कफ्र्यू के दौरान सुरक्षा बलों की गश्त बढ़ाना शामिल था।
सांसद अनिल बलूनी व भूपेंद्र यादव का रोल
मिशन जम्मू-कश्मीर फतह करने के में उत्तराखंड के राज्यसभा सदस्य अनिल बलूनी और भूपेंद्र यादव का योगदान भी कम नहींरहा है। क्योंकि गृह मंत्री अमित शाह ने इन्हें अपनी टीम का हिस्सा बनाकर उच्च सदन (राज्यसभा) में सदस्यों का समर्थन जुटाने का काम सौंपा गया था। राज्यसभा में भाजपा के पास बहुमत नहीं है। राज्यसभा सदस्य अनिल बलूनी और भूपेंद्र यादव ने टीडीपी के राज्यसभा सदस्यों को तोड़ा और समाजवादी पार्टी के सांसद नीरज शेखर, सुरेंद्र नागर, संजय सेठ और कांग्रेस सांसद सजय सिंह को राज्यसभा से इस्तीफा दिलवाने का प्रबंध किया। इसके बाद भाजपा को उच्च सदन में काफी बल मिला। सबसे आखिर में टीम बसपा (बहुजन समाज पार्टी) के नेता सतीश मिश्रा का समर्थन हासिल करने में कामयाबी पाई।
पत्रकारों को हिदायत
गृहमंत्री अमित शाह ने प्रमुख पत्रकारों (जिनकी गृह मंत्रालय तक पहुंच थी) के साथ भी बंद कमरे में बैठक की और अति संवेदनशील मुद्दों पर संतुलित रिपोर्टिग करने की हिदायत दी। शाह का मुख्य जोर शीर्ष स्तर की गोपनियता बरकरार रखने पर थी, जब तक कि वे पांच अगस्त को इस विधेयक को राज्यसभा के पटल पर पेश नहीं करते। दो अगस्त को शाह को भरोसा हो गया कि उनकी पार्टी को राज्यसभा में पर्याप्त समर्थन हासिल हो गया है और सोमवार को उच्च सदन में इस ऐतिहासिक विधेयक (जम्मू-कश्मीर के टुकड़े करने) को पेश किया गया। इस दौरान भाजपा सांसदों को व्हिप जारी किया गया था कि वे संसद में उपस्थित रहें, जहां महत्वपूर्ण विधेयक पारित किए जाने हैं।
राष्ट्रपति को भी भरोसे में लिया
नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने सोमवार को मंत्रिमंडल की बैठक बुलाने और मंत्रियों को मिशन कश्मीर की जानकारी देने का फैसला किया। सदन से पहले इस संबंध में एक प्रस्ताव पारित किया गया। इसी तरह, कानून और न्याय मंत्रालय को अनुच्छेद 370 निरस्त करने की अधिसूचना राष्ट्रपति से जल्द जारी करवाने का काम सौंपा गया। राज्यसभा में शोर-शराबे के बीच सोमवार को अमित शाह ने जब विधेयक पेश किया, तो भाजपा के एक सांसद ने प्रतिक्रिया की कि शाह का मिशन कभी नाकामयाब नहीं होता।
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