रविवार, 19 दिसंबर 2010
अमर उजाला
खबर प्लांट करने क¢ बाद अमर उजाला अ©र रिप¨र्टर बैकफुट पर
खबरची चैनल¨ं क¢ स्टिंगरों ने किया रिप¨र्टर का इस्तेमाल
मुरादाबाद। क¢ंद्रीय पुलिस चिकित्सालय (सीपीएच) क¢ पुराने प¨स्टमार्टम हाउस में रखे मानव कंकाल क¨ लेकर सनसनीखेज खबर प्लांट करने का खुलासा भड़ास पर हुआ त¨ अमर उजाला अ©र उसका रिप¨र्टर उमेश शर्मा बैकफुट पर आ गए। रिप¨र्टर न त¨ सनसनीखेज खुलासे क¨ मुकाम तक पहंुचा पाया अ©र न ही इस खबर का आखिरी छ¨र अथवा सबूत तलाश कर सका। इससे साबित ह¨ गया कि रिप¨र्टर ने खबर प्लांट की थी। भड़ास पर खबर प्लांट करने में अमर उजाला का रिप¨र्टर फंसा शीर्शक से खबर आने क¢ बाद अमर उजाला और उसका कथित ख¨जी रिपोर्टर अपनी खबर से संबंधित एक भी सबूत मजबूती क¢ साथ सामने नहीं ला सका। जबकि पहली खबर में रिप¨र्टर ने दावा किया था कि यहां कंकाल¨ं का खेल ह¨ रहा है। इस खेल का खुलासा ह¨ने से पहले अमर उजाला क¢ रिप¨र्टर क¢ खेल का खुलासा ह¨ गया। दरअसल खबर क¢वल इतनी थी कि मानव कंकालों क¨ लापरवाही से रखा गया है। 1988 से पहले क¢ कंकाल थे लिहाजा इस तरफ किसी अधिकारी या कर्मचारी का ध्यान ही नहीं गया। दसक¨ं पुराने कंकाल की सील अ©र संबंधित थाने की चिट अपने आप ही खत्म ह¨ गई। जबकि अमर उजाला ने छापा था कि स्वास्थ्य विभाग में लावारिस लाश¨ं क¢ साथ कंकाल¨ं का भी खेल ह¨ रहा है। वह भी इसलिए कि लावारिस लाश¨ं क¢ खेल में जेल गया सफाईकर्मी का आवास सीपीएच क¢ पुराने प¨स्टमार्टम हाउस क¢ बराबर में है। कागज¨ं में ज¨ पुराना प¨स्टमार्टम हाउस है उसे नासमझ रिप¨र्टर लगातार आवास लिखता रहा।
दरअसल यह खेल कुछ खबरची चैनलों के स्टिंगर¨ं का था। खबर इन्हीं ल¨ग¨ं ने प्लांट की थी। खबर क¨ चैनल पर चलवाने क¢ लिए स्टिंगर¨ं ने अमर उजाला क¢ रिप¨र्टर उमेश शर्मा का इस्तेमाल किया। उससे पहले अखबार में खबर छपवाई अ©र फिर ज्यादातर चैनल¨ं पर यह खबर चल गई। ऐसा उमेश शर्मा ने पहली बार नहीं किया। इससे पहले भी वह खबरची चैनलों के स्टिंगर¨ं क¢ हाथ¨ं इस्तेमाल ह¨ता रहा है। इस बार खबर प्लांट करने में वह फंस गया क्य¨ंकि फ¨ट¨ क¢ अलावा रिप¨र्टर क¢ पास क¨ई सबूत ही नहीं था। प्रशासन ने भी तभी रिप¨र्ट दर्ज कराने क¢ लिए हरी झंडी दी जब देखा कि खबरें प्लांट की जा रही हैं। अब अमर उजाला का रिप¨र्ट पूरे मामले क¨ मैनेज करने में लगा है। वह समझ©ते क¢ प्रयास भी कर रहा है।
लेखक क¢क¢ चैहान मुरादाबाद में पीटीआई अ©र डीएलए से जुड़े हैं।
मंगलवार, 7 दिसंबर 2010
शुक्रवार, 26 नवंबर 2010
गुरुवार, 25 नवंबर 2010
सोमवार, 25 अक्टूबर 2010
शनिवार, 14 अगस्त 2010
शनिवार, 24 जुलाई 2010
hiआगरा: मिस्ड काल ने करवाया बलात्कार
-ऐसा भी होता है
-मिस्ड काल ने गवा दी आबरू मिस्ड काल बन गयी एक लड़की के बलात्कार की वजह
एक मिस्ड काल ने आज एक लड़की को ऐसे मुकाम पर लाकर खड़ा कर दिया है की आज उसके पास सिवाए रोने के कुछ नहीं बचा
यह कहानी थोड़ी फ़िल्मी है मगर इसका अंत बहुत कड़वा है
मिस्ड कॉल से शुरू हुई एक और प्रेम कहानी बलात्कार में गिरफ्तारी पर जाकर खत्म हो गई। यह कहानी शमसाबाद के प्रेमी और उत्तरांचल के रामनगर की प्रेमिका के बीच चली। छह महीने बाद शमशाबाद के प्रेमी को उत्तरांचल पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।
नौ माह पूर्व शमसाबाद के रवि उर्फ राज शिवशंकर के मोबाइल से रामनगर मालधन चौड़ की एक युवती को धोखे से नंबर लग गया। पहले सॉरी हुआ और फिर बातचीत बढ़ने लगी। लड़की जहा अपने मन में प्रेम का दिया जला चुकी थी वही लड़के के मन में थी एक साजिश
यह लड़का मोहब्बत का नहीं हवास का भूखा था
12 फरवरी को रवि अपनी अनदेखी प्रेमिका के मिलने मालधन चौड़ पहुंच गया। प्यार के झांसे में लेकर वो उसे वह से भगा ले गया
इसके बाद लड़की के घर वालो ने पुलिस में मामला दर्ज करवाया
इसके बाद पंद्रह दिन लड़की को हवस का शिकार बनाने के बाद उक्त युवक लड़की को छोड़ कर भा गया
लड़की ने अदालत में बलात्कार की कहानी बताई तो पुलिस को आरोपी को ढूँढने के आदेश दिए गये
पुलिस की म्हणत ६माह बाद रंग लाइ और फ़ोन के आधार पर की गयी जांच में आरोपी की पहचान कर उसे गिरफ्तार कर लिया गया
ndi
-ऐसा भी होता है
-मिस्ड काल ने गवा दी आबरू मिस्ड काल बन गयी एक लड़की के बलात्कार की वजह
एक मिस्ड काल ने आज एक लड़की को ऐसे मुकाम पर लाकर खड़ा कर दिया है की आज उसके पास सिवाए रोने के कुछ नहीं बचा
यह कहानी थोड़ी फ़िल्मी है मगर इसका अंत बहुत कड़वा है
मिस्ड कॉल से शुरू हुई एक और प्रेम कहानी बलात्कार में गिरफ्तारी पर जाकर खत्म हो गई। यह कहानी शमसाबाद के प्रेमी और उत्तरांचल के रामनगर की प्रेमिका के बीच चली। छह महीने बाद शमशाबाद के प्रेमी को उत्तरांचल पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।
नौ माह पूर्व शमसाबाद के रवि उर्फ राज शिवशंकर के मोबाइल से रामनगर मालधन चौड़ की एक युवती को धोखे से नंबर लग गया। पहले सॉरी हुआ और फिर बातचीत बढ़ने लगी। लड़की जहा अपने मन में प्रेम का दिया जला चुकी थी वही लड़के के मन में थी एक साजिश
यह लड़का मोहब्बत का नहीं हवास का भूखा था
12 फरवरी को रवि अपनी अनदेखी प्रेमिका के मिलने मालधन चौड़ पहुंच गया। प्यार के झांसे में लेकर वो उसे वह से भगा ले गया
इसके बाद लड़की के घर वालो ने पुलिस में मामला दर्ज करवाया
इसके बाद पंद्रह दिन लड़की को हवस का शिकार बनाने के बाद उक्त युवक लड़की को छोड़ कर भा गया
लड़की ने अदालत में बलात्कार की कहानी बताई तो पुलिस को आरोपी को ढूँढने के आदेश दिए गये
पुलिस की म्हणत ६माह बाद रंग लाइ और फ़ोन के आधार पर की गयी जांच में आरोपी की पहचान कर उसे गिरफ्तार कर लिया गया
ndi
नैनीताल-झील का जादू
नैनीताल को हम झील का शहर भी कह सकते हैं। नैनीताल भारत के सबसे सुन्दर हिल स्टेशनों में से है। १९३९ मीटर की उंचाई पर बसे नैनीताल को एक अंग्रेज पी बैरन ने १८३९ में खोजा था।
नैनीताल से मेरा जुडाव बचपन से ही है। अब तो मुझे खुद भी याद नहीं कि कितनी बार मैं इस मनोरम दुनिया में आ चुका हूं। लेकिन फिर भी मैं यहां जब भी आता हूं मुझे एक नया सा एहसास होता है। शायद यही वो वजह है जिसके कारण मैं बार बार यहां आता हूं। आज कल पर्यटकों की बढती भीड़ के बाद भी इसने अपना पुराना आकर्षण नहीं खोया है।
नैनीताल का सबसे बडा़ आकर्षण यहां कि झील ही है। ये छोटा शहर सा इसके चारों और बसा है। नैनीताल को ये नाम भी झील से ही मिला है। कहते हैं कि जब भगवान शंकर सती के शव को लेकर दौड़ रहे थे। तब सती की आंख यहां गिरी थी। आंख के गिरने से बनी झील को नैनीताल कहा गया।
झील का आकार भी आंख के जैसा ही है। आज भी झील के उत्तरी किनारे पर नैना देवी का मंदिर बना है। नैनीताल आने वाला हर शख्स इस मंदिर में जरुर आता है।
नैनीताल एक घाटी में बसा है जिसके चारों और उंची उंची चोटियां हैं।जो इस हिल स्टेशन की खूबसूरती में चार चांद लगाती हैं। झील के साथ ही घाटी में बसा होना ही इसे दूसरे हिल स्टेशनों से अलग और खूबसूरत बनाता है।
शहर मुख्य रुप से झील के उत्तर और दक्षिण के किनारे पर बसा हैं। उत्तर के हिस्से को मल्लीताल और दक्षिण वाले भाग को तल्लीताल कहा जाता है।
मल्लीताल में ही नैनी मंदिर है। इसके अलावा मंदिर के पास ही सैंट जान चर्च भी है, १८४४ में बना ये चर्च आज भी बीते दिनों की याद ताजा कर देता है। मल्लीताल पर ही फ्लैट भी है ये झील के किनारे का मैदान हैं जहां नैनीताल आने वाले वाहनों के लिए पार्किंग की व्यवस्था कि गई है। साथ ही ये स्टेडियम का काम भी देता हैं।
फ्लैट के साथ ही है यहां का तिब्बती बाजार जिस भोटिया बाजार भी कहते हैं। नैनीताल आने वाले पर्यटकों में ये बाजार खासा लोकप्रिय है। यहां आप देसी विदेशी सामान जैसे कपडे़, कैमरे, घडियां, जूते, सजावट का सामान काफी सस्ते दामों पर खरीद सकते हैं। हां इसके लिए आप को मोल भाव करना आना चाहिए।
फ्लैट पर ही एक स्केटिंग रिंग बना है जहां स्केटिंग सीखी जा सकती है।झील के किनारे बाजार में घूमना और ठंडी हवा के बीच चाय की चुस्कियां लेने का अलग ही आनंद है।
मल्लीताल पर ही है रोप वे, इस रोप वे से स्नो व्यू तक जाया जा सकता है।ये लगभग २२०० मीटर उंची चोटी है। रोप पे जैसे ही आप ऊपर जाते हैं , नैनी झील अपने पूरे रुप में आप के सामने आती है।
स्नो व्यू से नैनीताल का नजारा देखा जा सकता है। अपने कैमरे में पूरे नैनीताल को लेने के लिए इससे अच्छी जगह और कोई नहीं है। स्नो व्यू से ही हिमालय की बर्फ से ढकी चोटियां देखी जा सकती हैं। इसके लिए यहां पर दूरबीन लगाई गई हैं लेकिन मौसम का साफ होना जरुरी है। यहां पर पुराने ब्रिटिश काटेज को कुमायु मंडल विकास निगम ने रेस्ट हाउस में बदल दिया है। हलचल से दूर यहां रहकर असली सुन्दरता को देखा जा सकता है।
शुक्रवार, 23 जुलाई 2010
गुरुवार, 22 जुलाई 2010
मंगलवार, 20 जुलाई 2010
सोमवार, 19 जुलाई 2010
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