गुरुवार, 19 सितंबर 2019

भ्रष्टों के जेल जाने का उद्घाटन

कांग्रेसी नेता अक्सर शोर मचाते थे कि भाजपा, कांग्रेस नेताओं पर भ्रष्टाचार और घोटालों के झूठे आरोप लगाकर बदनाम करती है। भाजपा के आरोप सही हैं तो वह अब तक हमारे किसी नेता को गिरफ्तार कर जेल नहीं भेजती।

1 बेटी शीना बोरा की हत्यारोपी इंद्राणी मुखर्जी के बयान से पी चिंदबरम संकट में
2 आईएनएक्स मीडिया की प्रमोटर इंद्राणी मुखर्जी सरकारी गवाह बनी

 कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, उनका बेटा राहुल गांधी, दामाद राबर्ट वाड्रा के साथ दिल्ली, राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तराखंड तक के सीनियर कांग्रेसी लीडरों का नाम अरबों रुपये के घोटाले करने के लिए सुर्खियों में रहा है।

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और दिग्गज कांग्रेस नेता हरीश रावत भी सीबीआई जांच के घेरे में हैं। उनके खिलाफ अप्रैल 2016 में सदन में फ्लोर टेस्ट से पहले बागी विधायकों को समर्थन के लिए घूस की पेशकश करने का आरोप है।

एफआईपीबी ने आईएनएक्स मीडिया को 2007 में वित्त मंत्री के तौर पर पी चिदंबरम के कार्यकाल में विदेश से 305 करोड़ रुपये फंड देने के लिए क्लीयरेंस में अनियमितता की गई।

कभी देश की राजनीति में चमकने वाले पूर्व केंद्रीय वित्त एवं गृह मंत्री पी चिदंबरम ने शायद कभी ख्वाब में भी नहींसोचा होगा कि जो सीबीआई और ईडी उनके इशारों पर नाचती थी वही एक दिन उन्हें गिरफ्तार भी करेगी। जिस सीबीआई मुख्यालय का निर्माण उन्होंने गृह मंत्री रहते हुए कराया था उसके आफिस में ही वह एक दिन घोटाले के आरोपी बनकर कैद होंगे। जिस सीबीआई को वह नचाते रहे हैं वही उनके आवास में जबरन दीवार लांघकर घुसेगी और हिरासत में ले लेगी, फिर गिरफ्तार करने का ऐलान करेगी, उनसे सवाल-जवाब करेगी। राजनीति में जिस ऊंचाई पर पी चिदंबरम पहुंच चुके थे वहां खड़े होकर राजनेताओं को लगने लगता है कि उनके सामने कानून, कोर्ट, पुलिस, सीबीआई, ईडी आदि सब के सब बौने हैं। इसी मुगालते में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम भी रहे, लेकिन उनकी यह गलतफहमी सीबीआई ने उन्हें गिरफ्तार कर दूर कर दी। देश के कद्दावर नेता को उसके ही घर में घुसकर गिरफ्तार किया तो घोटालेबाज राजनेताओं में खलबली मच गई। घोटालेबाजों को लगने लगा है कि अब उनका भी नंबर आ सकता है। देश की आजादी के बाद से केेंद्र की सरकार रही हो या राज्यों की सरकारें, सभी पार्टियां अपने विराधियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाती रही हैं, चुनाव के दौरान तो विरोधी पार्टियां भ्रष्ट नेताओं को जेल में डालने का शोर भी खूब मचाती रही हैं, लेकिन सत्ता हासिल होने पर विरोधी और भ्रष्ट नेताओं को जेल में ठूंसने के बजाय खुद देश और प्रदेश को लूटने में लग जाती हैं। यूपी में सपा और बसपा का यही खेल देखा जाता था, लेकिन अब देश और प्रदेशों में ऐसी पार्टी की सरकार बनी हैं जो वास्तव में भ्रष्टाचार के खिलाफ गंभीर है। घोटालेबाजों से निपटने का काम शुरू कर दिया है।
2014 में देश की सत्ता से बेदखल होने के बाद कांग्रेस के बुरे दिनों की शुरुआत हो गई। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, उनका बेटा राहुल गांधी, दामाद राबर्ट वाड्रा के साथ दिल्ली, राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तराखंड तक के सीनियर कांग्रेसी लीडरों का नाम अरबों रुपये के घोटाले करने के लिए सुर्खियों में रहा है। कांग्रेस अपने सबसे मुश्किल दौर से गुजर रही है। आईएनएक्स मीडिया केस में आईएनएक्स मीडिया की प्रमोटर इंद्राणी मुखर्जी के सरकारी गवाह बनने के बाद से चिदंबरम की मुश्किलें बढऩे लगी थीं, लेकिन वह दिल्ली हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत लेकर बचे फिर रहे थे। दरअसल जब पी चिदंबरम देश के वित्त मंत्री थे तब विदेशी निवेश की आड़ में एफआईपीबी में चल रहे खेल का खुलासा टू जी स्पेक्ट्रम घोटाले की जांच के दौरान सामने आया। इस डील में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच कर ही ईडी का ध्यान मैक्सिस से जुड़ी कंपनियों से चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम की कंपनियों में पैसे आने पर गया तो इस केस में घूसखोरी की परतें एक के बाद एक खुलती चली गईं। दरअसल आईएनएक्स मीडिया को फॉरन इंवेस्टमेंट प्रमोशन बोर्ड (एफआईपीबी) ने मई 2007 में 4.62 करोड़ रुपये के निवेश की मंजूरी दी थी। एफआईपीबी ने यह स्पष्ट कर दिया था कि कंपनी में डाउनस्ट्रीम इंवेस्टमेंट के लिए अलग से मंजूरी लेनी होगी। डाउनस्ट्रीम इंवेस्टमेंट (भारतीय कंपनी की ओर से अन्य में सब्सक्रिप्शन या शेयर्स खरीदने के जरिए इनडायरेक्ट फॉरन इंवेस्टमेंट होता है।) इसके विपरीत आईएनएक्स मीडिया ने 305 करोड़ रुपये से अधिक का फॉरन डायरेक्ट इंवेस्टमेंट हासिल कर लिया था, जबकि कंपनी को 4.62 करोड़ रुपये के इंवेस्टमेंट के लिए ही स्वीकृति मिली थी। यह सब तत्कालीन वित्त मंत्री पी चिदंबरम के कार्यकाल में हुआ था। जांच में खुलासा होने पर 15 मई 2017 को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने फॉरन इंवेस्टमेंट प्रमोशन बोर्ड (एफआईपीबी) की अनियमितता के मामले में एफआईआर दर्ज की थी। आरोप था कि एफआईपीबी ने आईएनएक्स मीडिया को 2007 में वित्त मंत्री के तौर पर पी चिदंबरम के कार्यकाल में विदेश से 305 करोड़ रुपये फंड देने के लिए क्लीयरेंस में अनियमितता की थी। एफआईआर के आधार पर प्रवर्तन निदेशालय ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया था। जांच के दौरान इंद्राणी मुखर्जी ने जांच एजेंसी को बयान दिया कि आईएनएक्स मीडिया की अर्जी फॉरेन इंवेस्टमेंट प्रमोशन बोर्ड (एफआईपीबी) के पास थी। तब वह पति पीटर मुखर्जी और कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी के साथ पूर्व वित्त मंत्री के दफ्तर नॉर्थ ब्लॉक में जाकर मिली थी। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को दिए अपने बयान में इंद्राणी ने कहा, पीटर मुखर्जी ने तत्कालीन वित्तमंत्री पी चिदंबरम से बातचीत शुरू की और आईएनएक्स मीडिया की अर्जी एफडीआई के लिए होना बताया था साथ ही अर्जी की एक प्रति भी चिदंबरम को दी थी। एफआईपीबी की मंजूरी के बदले चिदंबरम ने पीटर मुखर्जी के सामने शर्त रखी थी कि ‘उन्हें कार्ति चिदंबरम के बिजनेस में मदद करनी होगी।’ इंद्राणी के इसी बयान को ईडी ने चार्जशीट में दर्ज कर कोर्ट में सबूत पेश किया है।

आईएनएक्स मीडिया केस

15 मई 2017 आईएनएक्स मीडिया मामले में सीबीआई ने प्राथमिकी दर्ज की जिसमें इस समूह पर 2007 में विदेशों से 305 करोड़ रुपये लेने के लिए एफआईपीबी की मंजूरी हासिल करने में अनियमितता बरतने का आरोप लगाया गया।
2018  ईडी ने इस संबंध में धन शोधन का मामला दर्ज किया। सीबीआई ने पूछताछ के लिए वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व गृह मंत्री पी चिदंबरम को समन जारी किया।
30 मई 2018 चिदंबरम ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर कर सीबीआई द्वारा दर्ज भ्रष्टाचार के मामले में अग्रिम जमानत का अनुरोध किया।
23 जुलाई 2018 चिदंबरम ने प्रवर्तन निदेशालय के धन शोधन मामले में अग्रिम जमानत के लिए दिल्ली हाईकोर्ट में गुहार लगाई।
25 जुलाई 2018 दिल्ली हाईकोर्ट ने दोनों मामलों में गिरफ्तारी से उन्हें अंतरिम राहत दे दी।
25 जनवरी 2019 दिल्ली हाईकोर्ट ने दोनों ही मामलों में चिदंबरम की अग्रिम जमानत याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रखा।
20 अगस्त 2019 दिल्ली हाईकोर्ट ने चिदंबरम की अग्रिम जमानत की याचिका खारिज की। साथ ही कोर्ट ने पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री पी चिदंबरम को सुप्रीमकोर्ट का दरवाजा खटखटाने के लिए गिरफ्तारी से अंतरिम राहत देने से भी इन्कार कर दिया।
कांग्रेसी नेता अक्सर शोर मचाते थे कि भाजपा, कांग्रेस नेताओं पर भ्रष्टाचार और घोटालों के झूठे आरोप लगाकर बदनाम करती है। भाजपा के आरोप सही हैं तो वह अब तक हमारे किसी नेता को गिरफ्तार कर जेल नहीं भेजती, लेकिन अब घोटालेबाज भ्रष्ट कांग्रेस नेताओं को जेल भेजने का उद्घाटन हो गया, कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व गृह मंत्री पी चिदंबरम की गिरफ्तारी हुई तो कांग्रेसी फिर शोर मचाने लगे कि मोदी सरकार बदले की भावना से कार्रवाई कर रही है। इससे पहले भ्रष्ट नेता और झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा को अदालत तीन साल की जेल और 25 लाख रुपये का जुर्माना ठोक चुकी है। चारा घोटाले में आरजेडी मुखिया लालू यादव जेल में हैं। पी चिदंबरम कांग्रेस के पहले नेता नहीं हैं, जो भ्रष्टाचार में फंसे हुए हैं। उनके अलावा कई और कद्दावर कांग्रेसी नेता भी भ्रष्टाचार में फंसे हुए हैं। घोटालेबाज कांग्रेसी नेताओं की लिस्ट में सबसे ऊपर सोनिया गांधी, राहुल गांधी और राबर्ट वाड्रा का नाम आता है। ये सभी बेल पर बाहर हैं। इनके बाद मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के भांजे रतुल पुरी, अहमद पटेल, अशोक गहलौत और सचिन पायलट जैसे नेताओं के नाम भी लिस्ट में शामिल हैं। लोकसभा चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अक्सर शीर्ष नेताओं के जमानत पर बाहर होने, जेल के दरवाजे तक पहुंचाने और अंदर पहुंचाने जैसी चुटकी अपने भाषणों में लेते रहते थे। क्योंकि मोदी सरकार अपने पहले कालखंड में भ्रष्ट कांग्रेस नेताओं की कुंडली खंगाल चुकी थी। दिल्ली से लेकर हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र तक के बड़े कांग्रेस नेता सीबीआई, इनकम टैक्स और ईडी जैसी एजेंसियों के निशाने पर हैं। सीबीआई, इनकम टैक्स और ईडी जैसी एजेंसियां अब चिदंबरम के अलावा इन नेताओं पर कभी भी शिकंजा कस सकती हैं।

2011 का नेशनल हेराल्ड केस

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, उनके बेटे राहुल गांधी और अन्य कांग्रेस नेता इस मामले में फंसे हुए हैं। आरोप है कि गांधी परिवार ने हेराल्ड की संपत्ति का अवैध ढंग से इस्तेमाल किया है। इस मामले को लेकर सुब्रह्मïण्यम स्वामी 2012 में कोर्ट गए थे। कोर्ट ने लंबी सुनवाई के बाद 26 जून 2014 को दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने सोनिया गांधी, राहुल गांधी के अलावा मोतीलाल वोरा, सुमन दुबे और सैम पित्रोदा को तलब किया था। सुब्रह्मïण्यम स्वामी ने आरोप लगाया था कि सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने कांग्रेस पार्टी से लोन देने के नाम पर नेशनल हेराल्ड की दो हजार करोड़ रुपये की संपत्ति हड़प कर ली है। इसके बाद पांच लाख रुपये से यंग इंडिया कंपनी बनाई, जिसमें सोनिया और राहुल की 38-38 प्रतिशत हिस्सेदारी है। शेष हिस्सेदारी कांग्रेस नेता मोतीलाल वोरा और ऑस्कर फर्नांडिस के पास रही। अगस्ता वेस्टलैंड वीआईपी हेलीकॉप्टर घोटाला यह 2013-14 में सामने आया। इसमें कई राजनेताओं एवं सैन्य अधिकारियों पर अगस्ता वेस्टलैंड से मोटी घूस लेने का आरोप है। इस मामले में अहमद पटेल और कमलनाथ के भांजे रतुल पुरी फंसे हैं।
अगस्ता वेस्टलैंड का सौदा 3,600 करोड़ रुपये का था। जिसमें 360 करोड़ रुपये के घोटाले की बात सामने आई।

एंबुलेस घोटाला

एंबुलेस घोटाला में राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलौत और उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट फंसे हुए हैं। इसे 2010 से 2013 के बीच अंजाम दिया गया था। एंबुलेंस खरीदने के लिए जो टेंडर जारी किया गया था, उसमें गड़बड़ी की गई थी। 31 जुलाई 2014 को जयपुर के अशोक नगर थाने में जयपुर नगर निगम के पूर्व मेयर पंकज जोशी की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया था। करोड़ों की एंबुलेंस खरीद में पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम के पुत्र कार्ति चिदंबरम, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलौत, पूर्व स्वास्थ्य मंत्री एए खान, श्वेता मंगल, शफी माथेर और निदेशक एनआरएचएम के विरुद्ध आईपीसी की धारा 420 (धोखाधड़ी), 467 (जालसाजी), 468 (धोखाधड़ी के लिए जालसाजी), 471, और 120 (बी) के तहत मामला दर्ज किया गया था। ईडी अब तक 12 करोड़ की संपत्तियां आरोपियों से जब्त कर चुका है।

उत्तराखंड के हरीश रावत घोटाले में भी शामिल

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और दिग्गज कांग्रेस नेता हरीश रावत भी सीबीआई जांच के घेरे में हैं। उनके खिलाफ अप्रैल 2016 में सदन में फ्लोर टेस्ट से पहले बागी विधायकों को समर्थन के लिए घूस की पेशकश करने का आरोप है। हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता वीरभद्र सिंह पर भी केंद्रीय एजेंसियों की तलवार लटकी हुई है। उनके खिलाफ केंद्रीय एजेंसियों की जांच अभी भी चल रही है। वीरभद्र सिंह पर भी आय से अधिक संपत्ति रखने का मामला दर्ज है। सीबीआई ने सितंबर 2015 में सिंह की बेटी की शादी के दिन ही घर पर छापेमारी की थी। हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भूपिंदर सिंह हुड्डा भी भ्रष्टाचार के मामले में फंसे हुए हैं। उनके खिलाफ गुरुग्राम में जमीन सौदे के मामले में केस दर्ज है। कर्नाटक कांग्रेस के दिग्गज नेता डीके शिवकुमार पर आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज है। डीके शिवकुमार के 64 ठिकानों पर इनकम टैक्स ने 2017 में छापेमारी की थी।

कौन है इंद्राणी मुखर्जी

जिस इंद्राणी मुखर्जी के बयान से पी चिंदबरम संकट में हैं, वह इस समय अपनी ही बेटी शीना बोरा की हत्या के इल्जाम में सलाखों के पीछे है। शीना बोरा की हत्या 2012 में हुई थी। हत्या के बाद उसका शव जंगल में दफना दिया गया। शीना की हत्या का खुलासा उस समय हुआ जब पुलिस ने 2015 में इंद्राणी मुखर्जी के ड्राइवर को गिरफ्तार किया था। तभी पुलिस को पता चला कि इंद्राणी ने अपने पूर्व पति के साथ मिलकर अपनी बेटी की हत्या कर दी और लाश ठिकाने लगा दी। जांच में पता चला कि शीना की हत्या इसलिए की गई क्योंकि वह इंद्राणी को ब्लैकमेल कर रही थी। इसके अलावा शीना
के पीटर के बेटे राहुल से संबंध होने की भी बात सामने आई थी। इंद्राणी ने पूछताछ के दौरान इस बात का खुलासा किया था कि शीना उनकी बेटी थी, जबकि उसने अपने पति पीटर मुखर्जी को बहन बता रखा था। इसी राज को राज रखने के लिए शीना उसे ब्लैकमेल करती थी।

कांग्रेसियों में बौखलाहट

अपने दिग्गज नेता पी चिदंबरम की गिरफ्तारी से कांग्रेसी बौखला गए हैं। वे यह नहींसमझ पा रहे कि क्या करें क्या न करें? इसी बौखलाहट में कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल प्रेस कांफ्रेंस में कह बैठे कि चुनाव आते जाते रहते हैं, सरकारें बनती बिगड़ती रहती हैं, पीएम मोदी से वफादारी करने वाले ब्यूरोकेट पर हमारी भी नजर है। कपिल सिब्बल एक तरह से अधिकारियों को धमका रहे थे कि भविष्य में उनकी सरकार बनेगी तो निपट लेंगे।

के के चौहान

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